मां के चरणों का जल छिड़कते ही चेचक जैसे रोग से मिलती है मुक्ति, जानें मान्यता

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रोहिणी कविराज के पुत्र प्रह्लाद कुमार दास, मंदिर कमेटी के सदस्य रितेन सरकार, किशोर दास, कुंदन शाह ने Local 18 से बताया कि यह मंदिर 1948 में बना था. 1948 के समय पूर्णिया सहित सीमांचल इलाकों में चेचक जैसी महामारी का बहुत प्रकोप था.

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